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Yes Osho

Colour: White

Price: ₹10.00 ₹5.00 (50% off)

Stock:

“Ye Rishta Kya Hai – Osho” रिश्तों की प्रकृति, मनुष्य की स्वतंत्रता, प्रेम की पवित्रता और अहंकार मुक्त जीवन को बेहद सहज और गहराई से समझाने वाली किताब है।

Description

ओशो की किताब “Ye Rishta Kya Hai” रिश्तों को एक आध्यात्मिक दृष्टि से समझाती है। यह किताब बताती है कि रिश्ता तब सुंदर होता है जब उसमें स्वतंत्रता, प्रेम और जागरूकता हो—ना कि स्वामित्व, अपेक्षा और बंधन।

ओशो कहते हैं कि सच्चे रिश्ते दो स्वतंत्र आत्माओं के मिलन से बनते हैं, दो कैदियों से नहीं।


1. किताब का मुख्य संदेश (Osho Philosophy on Relationships)

यह किताब समझाती है:

  • प्रेम बंधन नहीं—स्वतंत्रता है

  • स्वामित्व किसी भी रिश्ते को नष्ट कर देता है

  • दो व्यक्तियों की आंतरिक जागरूकता रिश्ते को दिव्य बनाती है

  • प्रेम में अपेक्षा नहीं, स्वीकृति होनी चाहिए

  • रिश्ता तभी टिकता है जब दोनों पहले खुद को समझें

  • सच्चा प्रेम बदलता नहीं—गहरा होता है


2. यह किताब क्यों पढ़ें?

किताब पढ़ने से आपको समझ में आता है:

  • रिश्तों में दुख क्यों होता है

  • प्रेम और लगाव में फर्क

  • ईर्ष्या और स्वामित्व कैसे संबंधों को जकड़ते हैं

  • दो व्यक्तियों का स्वतंत्र रहकर जुड़ना

  • ध्यान (Meditation) से रिश्ते कैसे सुधरते हैं

यह किताब संपूर्ण रूप से मन को शांत, जागरूक और प्रेममय बनाने में मदद करती है।


3. किताब में बताए गए मुख्य पॉइंट्स

  • प्रेम बिना शर्त होना चाहिए

  • रिश्तों की जड़ में मनुष्य का अहंकार होता है

  • समझ और जागरूकता हर समस्या का समाधान है

  • प्रेम का अर्थ किसी को बदलना नहीं—स्वीकारना है

  • अकेलेपन से डरना नहीं, उसे समझना सीखें

  • ध्यान से रिश्तों में स्पष्टता आती है


4. किसे पढ़नी चाहिए?

यह किताब विशेष रूप से आदर्श है:

  • प्रेम संबंध में संघर्ष कर रहे लोगों के लिए

  • पति-पत्नी और कपल्स के लिए

  • आध्यात्मिक खोज करने वालों के लिए

  • अपनी भावनाओं को समझना चाहने वालों के लिए

  • Osho followers और self-awareness सीखने वालों के लिए


5. निष्कर्ष

“Ye Rishta Kya Hai – Osho” सिर्फ एक किताब नहीं बल्कि रिश्तों को अंदर से समझने और खुद को जानने का मार्ग है। यह सिखाती है कि सच्चे रिश्ते प्रेम, स्वतंत्रता और जागरूकता पर टिकते हैं—स्वामित्व और अपेक्षाओं पर नहीं।