“हस्तरेखा शास्त्र का वैज्ञानिक विवेचन” एक ऐसी अनोखी पुस्तक है जो प्राचीन भारतीय हस्तरेखा शास्त्र को आधुनिक विज्ञान, मनोविज्ञान और मानव-शारीर विज्ञान के साथ जोड़कर समझाती है। इस पुस्तक में हाथ की रेखाओं के निर्माण, उनके वैज्ञानिक कारणों, तंत्रिका तंत्र से संबंध, मनोवैज्ञानिक संकेतों और व्यवहार आधारित व्याख्याओं को तार्किक ढंग से प्रस्तुत किया गया है।
यह पुस्तक अंधविश्वास से दूर रहकर हस्तरेखा को व्यक्तित्व अध्ययन और मानसिक प्रवृत्तियों के विश्लेषण का एक उपकरण मानती है।
जो भी व्यक्ति अपने स्वभाव, निर्णय क्षमता, भावनाओं, स्वास्थ्य संकेतों या जीवन की दिशा को बेहतर समझना चाहता है, उसके लिए यह पुस्तक बेहद उपयोगी है।