“Mahabharata – Volume 2” महाभारत महाकाव्य का दूसरा और अत्यंत महत्वपूर्ण खंड है, जिसमें पांडवों के युवावस्था, उनके संघर्ष, द्रोणाचार्य के अधीन शिक्षा, कौरवों की ईर्ष्या, लक्षागृह की घटना और वनवास की शुरुआत जैसे निर्णायक प्रसंग आते हैं।
यह खंड मानव स्वभाव, राजनीति, छल-कपट, साहस, धर्मसंकट और परिवारिक तनावों को गहराई से दर्शाता है।
इस पुस्तक में आप पढ़ेंगे—
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पांडवों और कौरवों की शिक्षा
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द्रोणाचार्य, कर्ण, अर्जुन के संघर्ष
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दुर्योधन की ईर्ष्या और षड्यंत्र
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लक्षागृह दहन की घटना
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पांडवों का पलायन और ब्राह्मण वेश
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द्रौपदी स्वयंवर
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भीम-हिडिंबा और अर्जुन-उलूपी व नागकन्याओं की कथा
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राजसूय यज्ञ की तैयारी
“Mahabharata – Volume 2” महाकाव्य के उन अध्यायों को समेटता है जहाँ कथा नायक-प्रतिनायक के चरित्र और स्थितियों का निर्माण होता है, और आगे होने वाले महान युद्ध की नींव मजबूती से तैयार होती है।